जोगीरा सारारारा................................
होली त सब किओ बुझैत छथीन मुदा हम मिथिलांचल क वासी एकरा फगुआ कहैत छि. फगुआ क मिथिला में एकटा अलगे पहचान अछि . सरस्वती पूजा क समय वसंत क पुरबा जखने चलाइय सब होली के विषय में सोचअ लागैत छि. होली शब्द सुनतही गामक याद अबैय ओ श्याम बाबु क टेक्टर ताहि पर गामक नेना भुटका सब अपन अपन मुंह लाल हरियर पियर केने, आगू आगू बाबा काका सबहक हुजूम आ नब्गार्हा सब ढोलक झैल लेने सारारारा गबैत बड नीक लागैत अछि. देखल जाऊ गामक याद आयल त भांग नै रहत इ भा नै सकैया कियाकि फगुआ आर भांग में बहुत घनिष्ट सम्बन्ध अछि. हमारा नै लगैय जे फगुआ में भांग खेबा से कियो परहेज करबाक प्रयास कराइ छैथ. मुदा एही कड़ी में एकटा बड पैघ नशा जुडल जा रहल अछि दारु क. हमरा त इ बुझना जैयअ जे किछु दिन अगर इ दशा रहल त मिथिला में फगुआ क अस्तित्वा नै रहत. अपनेक सब देखैत हेबई जे लोक दारु पीब क फुच्च भा जै छैथ आ सगरो गाम गोबर जेना लेर्हैल घूरे छथी. ता हमर इ मिथिला से अपील जे फगुआ क फगुआ रहअ दी अभागुआ नै बनाबी. बाकि फगुआ क ढेर ढेर शुभकामना. खूब रंग उडाऊ अबीर खेलु मुदा भाईचारा से दूर नै भटकू.जोगीरा सारारारा................................

No comments:
Post a Comment