Wednesday, 29 June 2011

ये लूट का सिलसिला..............

दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे
हम वतन के लिए॒ सिर कटाते रहे


280 लाख करोड़ का सवाल है ...
भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के
डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह
भी कहा है कि भारत का लगभग 280
लाख करोड़
रुपये उनके स्विस
बैंक में जमा है. ये रकम
इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट
बिना टैक्स के
बनाया जा सकता
है.
या यूँ कहें कि 60 करोड़
रोजगार के अवसर
दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है
कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4
लेन रोड बनाया
जा सकता है. ऐसा भी कह
सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये
रकम
इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60
साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत
नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं
और नोकरशाहों ने
कैसे देश को

लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है.
इस सिलसिले को
अब रोकना

बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज
करके करीब 1 लाख
करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280
लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64
सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने
करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट
लोगों द्वारा जमा
करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की
कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके
रखा हुआ
है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार
है.हाल ही में हुवे घोटालों का
आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी
स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन
से घोटाले
अभी उजागर होने वाले है ........

Friday, 13 May 2011

पोलिथीन हटाओ प्राण बचाओ


लोगों में दिनो दिन बढ़ता पॉलीथीन का उपयोग अब प्रदूषण के लिए खतरनाक होते जा रहा है। पॉलिथीन पर रोक के प्रयास तो कई बार हुए लेकिन इसका उपयोग कम होने के बजाए लगातार बढ़ते जा रहा है। लोग पॉलिथीन का उपयोग कर स्वयं अपने भविष्य के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं।

बाजार में लगभग प्रत्येक सामान के खरीदी के साथ आसानी से उपलब्ध होने वाला पॉलिथीन बहुत सस्ती होती हैं इसलिए इसके खतरों को जानते हुए भी लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे है। पॉलिथीन कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की जमीन पर पड़े पॉलिथीन को पालतू जानवर अपने भोजन के साथ निगल लेते हैं जो उनकी मौत तक का कारण बनता है। पॉलिथीन जमीन की उर्वरक क्षमता को भी तेजी से प्रभावित कर रही है। पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाने के साथ साथ आम जनता में जागरुकता लाने व्यापक पैमाने पर कार्यक्रम की भी जरूरत है। पॉलिथीन के उपयोग करने के बाद उसको संग्रहित करने की व्यवस्था हो जिससे उसी पॉलिथीन को फिर से उपयोग के लायक बनाया जा सके इससे प्रदूषण की समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है। पॉलिथीन पैक पान मसाला तथा गुटखों पर भी रोक लगाई गई है लेकिन ऐसे पाउच धड़ल्ले से बिक रहे हैं। सरकार नियम तो बनाती है लेकिन पालन नहीं होता जिसके कारण लोग पॉलिथीन के उपयोग धडल्ले से कर रहे है।

भास्कर के सौजन्य से

Thursday, 12 May 2011

हमरा जागरूक होबाक चाही

हम बात क रहल छि पोलीथींन  के. आजुक समय में पोलीथींन  हमर रोजमर्रा के जीवन के एकता अभिन्न अंग भा गेल अछि . मुदा एकर पर्यावरण पर बहुत बरका असर पैर रहल अछि  . एकटा प्लास्टिक के नष्ट  होबा में जते समय लगे छाई तत्बाई में अपन सब के कई टा पुस्त बीत जै छाई. भारत वर्ष में कतेक गोटा एकरा हटेबाक लेल प्रयाश का रहल छैथ किनको सफलता भेतलैन किओ सफलता के इंतजार में छैथ . टा आओ हमहू सब मिल के एकरा हतेबक प्रयाश करी . हमारा हिसाब से हिमानचल , महाराष्ट्र , जम्मू   और गुजरात के किछु  प्रान्त में अहि विषय  पर उत्तम काज भेल आ सफलता सेहो भेटल . त इ प्रयाश हम अपन मिथिला बंधू से सेहो करबाक इच्छा जत्बाई छि . हम आहा सब के कल जोरी के विनती कराइ छि जे एकरा एकही बेर नही मुदा धीरे धीरे हटेबाक प्रयाश करू . अपन सब के सरकार एकरा हटेबाक लेल बड्ड पैघ पैघ बात बनबाई छैथ मुदा ख़तम  करबाक लेल प्रयाश एकदम नहीं कराइ छैथ . पोलीथिन मनुष्य समेत अन्य जिव के लेल सेहो खतरनाक अछि और ओकरा जरेबाक बाद निकलल धूआन कैंसर के न्योता देत अछि . प्रत्येक वर्ष ५०० विलियन पोलीथिन के उपयोग पूरा विश्व में होइत अछि . एखन देश दुनियां के पहिल चिंता अछि बिग्रैत पर्यावरण . लोक एकरा बचेबक में अपन भूमिका के नही बुझाई छैथ और कहै छैथ हम कैए की सकै छि ? एतेक सोचला के बाद हमहू एहे सोची छि  जे हमारा जागरूक होबाक चाही  .

धन्यबाद
अपनेक विभूति झा

Thursday, 5 May 2011

झंझारपुर एक नजर

झंझारपुर (मधुबनी)। एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार बुधवार को पूर्व मध्य रेलवे समस्तीपुर के डीआरएम सत्य प्रकाश त्रिवेदी ने झंझारपुर जक्शन का निरीक्षण किया। इससे पूर्व बीते गुरुवार को औचक निरीक्षण में जंक्शन के व्यवस्था से खफा डीआरएम ने एसएस सहित कुल आठ कर्मियों को निलंबित कर दिया था। निलंबित कर्मियों को मंगलवार को उस समय बड़ी राहत मिली जब डीआरएम ने भविष्य में गलती न करने की चेतावनी के साथ निलंबन खत्म कर दिया। बुधवार को पहुंचे डीआरएम सत्य प्रकाश त्रिवेदी जंक्शन की साफ सफाई की व्यवस्था संतुष्ट नजर आए। निरीक्षण के दौरान उपस्थित कर्मियों को डीआरएम ने सभी व्यवस्थाएं चुस्त दुरूस्त रखने का आदेश दिया। रेलवे सूत्र के अनुसार डीआरएम ने तमुरिया घोघरडीहा एवं निर्मली स्टेशनों का भी निरीक्षण बुधवार को किया और कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिया।
जागरण के सौजन्य से

Monday, 18 April 2011

मैथिलि संगीतक पतन


 मिथिलाक सांस्कृतिक परम्परा संगीतक क्षेत्र में देखल जा सकैत अछि. प्राचीन मिथिलाक शासक संगीतज्ञ लोकनिक के संरक्षण दैत छलाह. एकर अनेको उदाहरण अछि. नान्यदेवक ( ११०७-११३३ ई.)  अवदान कदापि विस्मृत नहीं कैल जा सकैत अछि. लोकप्रिय रागक क्षेत्र में हुनक बड़ पैघ योगदान छलैन. ओ स्वयं १६० रागक प्रतिपादन कैने छलाह. तत्पशात हरिसिंहदेव, सिंह भूपाल, जगधर, जग्ज्योतिर्मल, वंशमणि झा, शुभंकर ठाकुर, घनश्याम मल्लिक, चंदा झा आ अनेकानेक व्यक्तिक नाम एही क्षेत्र में ज्योतित भेल.
          मिथिलाक चारिटा संगीत घराना प्रसिद्ध छल -अमता, मधुबनी, पंचोभ, आ पंचगछिया.ई सब मिली क  १०० वर्ष सँ मिथिला मध्य जन-मन में संगीतक आनंद प्रवाहित क रहल छैथ. 
         
                  मुदा दुखक बात इ जे आइ मिथिला लोक संगीतक धरोहर नष्ट  भ रहल अछि. मैथिलि लोक गीतक स्वर में पतन स्पष्ट परिलक्षित होइत अछि. ओकरा आइ बम्बैया तर्ज पर गाओल जा रहल अछि. भोजपुरी भाषाक गीतक अनुकरण एकरा मुख्य धारा सँ भटका रहल अछि. विभिन्न मैथिलि कैसेट एकर प्रत्यक्ष प्रमाण अछि. गाम-गाम में एखनो दुर्गापूजा, महादेवपूजा जेहन आयोजन होएत अछि. मुदा जतय पहिने शास्त्रीय गायन होएत छल ओतए आब पशिमी पॉप धुन पर आधारित आर्केस्ट्रा के बिना मनोरंजन संभव नहीं बुझाना जाइत अछि. 
    त आऊ हम सब मिलिके मिथिलांचलक संगीतके लुप्त होबा सँ बचाबी.      

Sunday, 17 April 2011

दरभंगा समाचार

दिनांक १६/४/२०११ शैन दिन बहेरी थाना अंतर्गत लहेरियासराय बहेरी मार्ग पर दू गोटा मौत के घाट उतैर गेलाह. घटनास्थल पर मौजूद लोक सब के अनुसार दुनु गोटे सड़क पार करबाक क्रम में एकता ट्रक के चपेट में आइब गेलाह जेहि स घटनास्थल पर हुनकर मृतु भ गेल. 
          डी.एस. पी. अंजनी कुमार कहलें जे ट्रक चालाक नशा में छल ओकर पहचान श्रवण कुमार के रूप में कैल गेल अछि .

Thursday, 7 April 2011

जन लोकपाल बिल की शर्तें

         
न्यायाधीश संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाया गया यह विधेयक लोगों द्वारा वेबसाइट पर दी गई प्रतिक्रिया और जनता के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इस बिल को शांति भूषण, जे एम लिंग्दोह, किरन बेदी, अन्ना हजारे आदि का समर्थन प्राप्त है। इस बिल की प्रति प्रधानमंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक दिसम्बर को भेजा गया था।
1. इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा।
2. यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी। कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी की जांच की जा सकेगी
3. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कई सालों तक मुकदमे लम्बित नहीं रहेंगे। किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी। ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा और भ्रष्ट नेता, अधिकारी या न्यायाधीश को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।
4. अपराध सिद्ध होने पर भ्रष्टाचारियों द्वारा सरकार को हुए घाटे को वसूल किया जाएगा।
5. यह आम नागरिक की कैसे मदद करेगा: यदि किसी नागरिक का काम तय समय सीमा में नहीं होता, तो लोकपाल जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा और वह जुर्माना शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा।
6. अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय सीमा के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं और उसे यह काम एक महीने के भीतर कराना होगा। आप किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं जैसे सरकारी राशन की कालाबाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, पंचायत निधि का दुरुपयोग। लोकपाल को इसकी जांच एक साल के भीतर पूरी करनी होगी। सुनवाई अगले एक साल में पूरी होगी और दोषी को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।
7. क्या सरकार भ्रष्ट और कमजोर लोगों को लोकपाल का सदस्य नहीं बनाना चाहेगी? ये मुमकिन नहीं है क्योंकि लोकपाल के सदस्यों का चयन न्यायाधीशों, नागरिकों और संवैधानिक संस्थानों द्वारा किया जाएगा न कि नेताओं द्वारा। इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से और जनता की भागीदारी से होगी।
8. अगर लोकपाल में काम करने वाले अधिकारी भ्रष्ट पाए गए तो? लोकपाल / लोकायुक्तों का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा। लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच अधिकतम दो महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा।
9. मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक संस्थानों का क्या होगा? सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (अंटी कारप्शन डिपार्टमेंट) का लोकपाल में विलय कर दिया जाएगा। लोकपाल को किसी न्यायाधीश, नेता या अधिकारी के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिए पूर्ण शक्ति और व्यवस्था भी होगी।
विकिपीडिया के सौजन्य से

अण्णा हजारे : एक नजर

परिचय
किसन बाबूराव हजारे (जन्म 15 जून, 1938), भारत के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अधिकांश लोग उन्हें अण्णा हजारे के नाम से ही जानते हैं। सन् १९९२ में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। सूचना के अधिकार के लिये कार्य करने वालों में वे प्रमुख थे। वे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई करने के लिये भी प्रसिद्ध हैं।

15 जून 1938 को महाराष्ट्र के अहमद नगर के भिंगर कस्बे में जन्मे अन्ना का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा। पिता मजदूर थे। दादा फौज में। दादा की पोस्टिंग भिंगनगर में थी। वैसे अन्ना के पुरखों का गांव अहमद नगर जिले में ही स्थित रालेगन सिद्धि में था। दादा की मौत के सात साल बाद अन्ना का परिवार रालेगन आ गया। अन्ना के छह भाई हैं। परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुम्बई ले गईं। वहां उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की। परिवार पर कष्टों का बोझ देखकर वह दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचनेवाले की दुकान में 40 रुपये की पगार में काम करने लगे। इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगन से बुला लिया।
छठे दशक के आसपास वह फौज में शामिल हो गए। उनकी पहली पोस्टिंग बतौर ड्राइवर पंजाब में हुई। यहीं पाकिस्तानी हमले में वह मौत को धता बता कर बचे थे। इसी दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से उन्होंने विवेकानंद की एक बुकलेट 'कॉल टु दि यूथ फॉर नेशन' खरीदी और उसको पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी समाज को समर्पित कर दी। उन्होंने गांधी और विनोबा को भी पढ़ा। 1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया। मुम्बई पोस्टिंग के दौरान वह अपने गांव रालेगन आते-जाते रहे। चट्टान पर बैठकर गांव को सुधारने की बात सोचते रहते।
जम्मू पोस्टिंग के दौरान 15 साल फौज में पूरे होने पर 1975 में उन्होंने वीआरएस ले लिया और गांव में आकर डट गए। उन्होंने गांव की तस्वीर ही बदल दी। उन्होंने अपनी जमीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी। आज उनकी पेंशन का सारा पैसा गांव के विकास में खर्च होता है। वह गांव के मंदिर में रहते हैं और हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए बनने वाला खाना ही खाते हैं। आज गांव का हर शख्स आत्मनिर्भर है। आस-पड़ोस के गांवों के लिए भी यहां से चारा, दूध आदि जाता है। गांव में एक तरह का रामराज है। गांव में तो उन्होंने रामराज स्थापित कर दिया है। अब वह अपने दल-बल के साथ देश में रामराज की स्थापना की मुहिम में निकले हैं : भ्रष्टाचार रहित भारत।
प्रमुख कार्य
अन्ना हजारे ने 1975 से सूखा प्रभावित रालेगांव सिद्धि में काम शुरू किया। वर्षा जल संग्रह, सौर ऊर्जा, बायो गैस का प्रयोग और पवन ऊर्जा के उपयोग से गांव को स्वावलंबी और समृद्ध बना दिया। यह गांव विश्व के अन्य समुदायों के लिए आदर्श बन गया है।
सम्मान

विकिपीडिया के सौजन्य से

Tuesday, 5 April 2011

आखिर क्या जताना चाहते हैं अफरीदी

पाकिस्‍तानी कप्‍तान शाहिद आफरीदी द्वारा भारतीयों को 'छोटे दिल वाला' बताए जाने को मुस्लिम विद्वानों ने पाकिस्‍तान के मदरसे में पढ़ाए जाने वाले नफरत के पाठ के रूप में लिया है। उन्‍होंने आफरीदी को सलाह दी है कि वे अपनी ऊर्जा कट्टरपंथ से लड़ने में लगाएं। आफरीदी ने एक पाकिस्‍तानी टीवी चैनल से कहा था, 'भारतीयों का दिल कभी भी मु‍सलमानों और पाकिस्‍तानियों जैसा नहीं हो सकता। मुझे नहीं लगता कि उनका दिल पाक और विशाल हो सकता है, जैसा कि अल्‍लाह ने हमें बख्‍शा है।' हालांकि बाद में भारतीय चैनल से बात करते हुए आफरीदी बयान से साफ मुकर गए।शिया मौलाना जहीर अब्‍बास ने मीडिया को बताया, 'आफरीदी का यह बयान गैर जिम्‍मेदाराना और इस्‍लाम के उसूलों के खिलाफ है। इस्‍लाम में किसी को नीचा दिखा कर खुद को बेहतर बताने की प्रवृत्ति को कभी बढ़ावा नहीं दिया गया।'ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्‍य कमाल फारूकी ने कहा कि आफरीदी पाकिस्‍तानी टीम की मोहाली में हुई हार को पचा नहीं पाए। इ‍सलिए उनके बयान को अनसुना कर देना चाहिए।उधर, पाकिस्‍तानी विदेश मंत्रालय ने भी आफरीदी को झिड़का है। मंत्रालय का कहना है कि भारत-पाकिस्‍तान कूटनीति पर आफरीदी को बोलने का कोई हक नहीं है। पाकिस्‍तानी कप्‍तान ने यह भी कहा था कि भारतीयों से चाहे जितने संबंध बना लें, बात नहीं बनेगी। उन्‍होंने कहा था कि भारतीय संबंध बनाने लायक नहीं हैं। उनसे बातचीत का कोई फायदा नहीं है।

Sunday, 20 March 2011

खुनक होली

गाम घरक विचार व्यवस्था से ता हम इ पूर्वानुमान केने रही जे फगुआ के सांझ तक किछु हिंसक घटना क समाचार भेटबे करत मुदा एही रूप से खून खुनामहीं होयत एकर गुंजाईश हमारा दिमाग से बहार छल. घटना हमारा गाम में आ  संगही गामक आस पास सेहो भेल.

१. घटना दिन के दस बजे क छि झंझारपुर में आपसी भिरंत भेल जाही में लोक सब होली क नाम पर पघरिया निकल्लैन आ कट्टम कट्टा भेल लेकिन जगत जननी क असीम कृपा छलैन जे किनको अपन जान से हाथ नहीं धोबे परलैन.
२. दोसर  घटना लोहना रेलवे स्टेशन क कात अवस्थित बरका गाम क छि जत गामक लोक सब मिल क थाना क बरा  बाबू क धुनी  देलखिन. आ ओहिठाम सर्व्सीमा आ बरका गामक बिच सेहो मारा  पीटी क खबर अछि.
३. तेसर घटना हमर गाम महिनाथपुरक छि जाही में एकटा युवक जिनक नाम रितेश छैन ओ ग़लतफ़हमी क शिकार भेलाह आ चौमथ टोल परहक किछु लोक हुनका अपन शिकार बना लेलखिन. ताहि हल्ला गुल्ला के क्रम में जम्पुरी टोलक लोक सब सेहो भैग क एलाह ओहिठाम पता लागल जे रामकुमार नामाक युवक जनि बुझी क झगड़ा लगौने छलाह. इ बात क पोल खुजितेही बुझु जेना लागल लोक सब झगरा हटाबई क लेल नही बल्कि फूटबाल खेलाइल आयल छलाह जेहि में रामकुमार के फूटबाल क भूमिका निभाब परल.
४. एकरा बाद मेंहथ,कोठिया,भराम,रैयाम आ हैठीबाली में सेहो छिट पुट घटना क खबर एही बेरका फगुआ क शर्मसार केलक.

Wednesday, 16 March 2011

फगुआ आ भांग

जोगीरा सारारारा................................
होली त सब किओ बुझैत छथीन मुदा हम मिथिलांचल क वासी एकरा फगुआ कहैत छि. फगुआ क मिथिला में एकटा अलगे पहचान अछि . सरस्वती पूजा क समय वसंत क पुरबा जखने चलाइय  सब होली के विषय में सोचअ लागैत छि. होली शब्द सुनतही गामक याद अबैय ओ श्याम बाबु क टेक्टर ताहि पर गामक नेना भुटका सब अपन अपन मुंह लाल हरियर पियर केने,  आगू आगू बाबा काका सबहक हुजूम आ नब्गार्हा सब ढोलक झैल लेने सारारारा गबैत बड नीक लागैत अछि. देखल जाऊ गामक याद आयल त भांग नै रहत इ भा नै सकैया कियाकि फगुआ आर भांग में बहुत घनिष्ट सम्बन्ध  अछि. हमारा नै लगैय जे फगुआ में भांग खेबा से कियो परहेज करबाक प्रयास कराइ छैथ. मुदा एही कड़ी में एकटा बड पैघ नशा जुडल जा रहल अछि दारु क. हमरा त इ बुझना जैयअ  जे किछु दिन अगर इ दशा रहल त मिथिला में फगुआ क अस्तित्वा नै रहत. अपनेक सब देखैत हेबई जे लोक दारु पीब क फुच्च भा जै छैथ आ सगरो गाम गोबर जेना लेर्हैल घूरे छथी. ता हमर इ मिथिला से अपील जे फगुआ क फगुआ रहअ दी अभागुआ नै बनाबी. बाकि फगुआ क ढेर ढेर शुभकामना. खूब रंग उडाऊ अबीर खेलु मुदा भाईचारा से दूर नै भटकू.

जोगीरा सारारारा................................

Friday, 11 March 2011

कहर करोड़ों का

 अनियंत्रित लोग, पैसो के लिए भागमभाग के बीच पहली बार थर्रायी जन समुदाय  १ नवम्बर १७५५(1755) को. जिसे हम लोग सुनामी के नाम से जानते हैं. सुनामी के इतिहास के उधेड़बुन में जब मैं  इतिहास के पन्नों को उलटाया तो मेरे रोंगटे खड़े हो गये. मैंने पाया की एक कम्पन और ६०,०००(60,000) मौतें, ये नजारा था यूरोपियन देशो का. दूसरा पन्ना ३६०००(36000) लोगों के खून से खुला, तीसरे पन्ने पर २७०००(27000) लोग अपने प्राणों की बजी दे चुके थे. जैसे जैसे मै पन्ना उलटता गया मेरा हृदय मनो कुछ पल के लिए उन सब के बिच समां  गया और मेरे रोंगटे खड़े हो गये.कितना निर्दयी है हमारा भगवन, हमारा परवरदिगार लगता है की उसे हमारे प्राणों से खेलने में मज़ा आता है और इन प्राणियों  पर कहर बरपा  देता है. यही सब सोचते सोचते मै उस पुस्तक के अंतिम पन्नों तक पहुँच गया जिसके ऊपर नाम था जापान का, तारीख ११-०३-२०११ की और दृश्य जलती रिफैनेरी का, खिलौनें की तरह बहता कार और हवाईजहाज और उसके बिच मौत के सामने नाचता इन्सान वाकई दुखद ........पुस्तक जिसमे करोड़ों लोग जो मौत को गले लगा चुके थे को पढने के बाद  मैं यही सोचता रहा और इश्वर को कोसता रहा की आखिर इस करोड़ों  के कहर से क्या मिला उसे ........... 

विद्यापति गीत

चानन भेल विषम सर रे, भुषन भेल भारी।
सपनहुँ नहि हरि आयल रे, गोकुल गिरधारी।।
एकसरि ठाठि कदम-तर रे, पछ हरेधि मुरारी।
हरि बिनु हृदय दगध भेल रे, झामर भेल सारी।।
जाह जाह तोहें उधब हे, तोहें मधुपुर जाहे।
चन्द्र बदनि नहि जीउति रे, बध लागत काह।।
कवि विद्यापति गाओल रे, सुनु गुनमति नारी।
आजु आओत हरि गोकुल रे, पथ चलु झटकारी।।


गोसौनिक गीत

जय जय भैरवि असुरभयाउनि, पसुपति–भाबिनि माया ।
सहज सुमति वर दिअ हे गोसाञुनि, अनुगति गति तुअ पाया ।।

बासर–रइनि सवासने सोभित, चरन चन्‍द-मनि-चूड़ा ।
कतओक दैत मारि मुहे मेरल, कतन उगिलि करु कूड़ा ।।

सामर बदन, नयन अनुरञ्जित, जलद जोग फुल कोका ।
कट-कट विकट ओठ–पुट पाँड़रि, लिधुर–फेन उठ फोका ।।

घन घन घनन घुघुरु कटि बाजए, हन हन कर तुअ काता ।
विद्यापति कवि तुअ पद सेवक, पुत्र बिसरु जनु माता ।।

जय जय भैरवि असुरभयाउनि, पसुपति–भाबिनि माया ।
सहज सुमति वर दिअ हे गोसाञुनि, अनुगति गति तुअ पाया ।।

मिथिला प्रणाम

मिथिला पुत्र विभूति भूषण झा के तरफ सौ समस्त मिथिलाबसी क   प्रणाम