Thursday, 12 May 2011

हमरा जागरूक होबाक चाही

हम बात क रहल छि पोलीथींन  के. आजुक समय में पोलीथींन  हमर रोजमर्रा के जीवन के एकता अभिन्न अंग भा गेल अछि . मुदा एकर पर्यावरण पर बहुत बरका असर पैर रहल अछि  . एकटा प्लास्टिक के नष्ट  होबा में जते समय लगे छाई तत्बाई में अपन सब के कई टा पुस्त बीत जै छाई. भारत वर्ष में कतेक गोटा एकरा हटेबाक लेल प्रयाश का रहल छैथ किनको सफलता भेतलैन किओ सफलता के इंतजार में छैथ . टा आओ हमहू सब मिल के एकरा हतेबक प्रयाश करी . हमारा हिसाब से हिमानचल , महाराष्ट्र , जम्मू   और गुजरात के किछु  प्रान्त में अहि विषय  पर उत्तम काज भेल आ सफलता सेहो भेटल . त इ प्रयाश हम अपन मिथिला बंधू से सेहो करबाक इच्छा जत्बाई छि . हम आहा सब के कल जोरी के विनती कराइ छि जे एकरा एकही बेर नही मुदा धीरे धीरे हटेबाक प्रयाश करू . अपन सब के सरकार एकरा हटेबाक लेल बड्ड पैघ पैघ बात बनबाई छैथ मुदा ख़तम  करबाक लेल प्रयाश एकदम नहीं कराइ छैथ . पोलीथिन मनुष्य समेत अन्य जिव के लेल सेहो खतरनाक अछि और ओकरा जरेबाक बाद निकलल धूआन कैंसर के न्योता देत अछि . प्रत्येक वर्ष ५०० विलियन पोलीथिन के उपयोग पूरा विश्व में होइत अछि . एखन देश दुनियां के पहिल चिंता अछि बिग्रैत पर्यावरण . लोक एकरा बचेबक में अपन भूमिका के नही बुझाई छैथ और कहै छैथ हम कैए की सकै छि ? एतेक सोचला के बाद हमहू एहे सोची छि  जे हमारा जागरूक होबाक चाही  .

धन्यबाद
अपनेक विभूति झा

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