Monday, 15 April 2013

आतंकवाद से बड़ा खतरा सड़क दुर्घटना

 भारत युवा देश है और हमारे युवकों को रफ़्तार से खेलने का इतना शौक है कि मौत की रफ़्तार भी थमने का नाम नहीं ले रही ।  कहा जाता है की भारत में आतंकवादी हमले, नक्सली द्वारा पुलिस को उड़ाने जैसे कामों को अधिक संख्या में अंजाम दिया जा रहा है लोग यहाँ के प्रशासन को हमेशा दुत्कारते है।  लेकिन लोगों का दुत्कारना भी ठीक है क्योंकि मेरे आँख के सामने की घटना है चूँकि मैं अभी जमशेदपुर में हूँ तो यहीं की बात कर रहा हूँ ।  साकची नाम का एक छोटा सा सुन्दर जगह जिसे लोग इस शहर का दिल भी कहते हैं वहाँ बीच सड़क पे तिपहिये लगाकर यात्री चढाने के लिए मौके पर मौजूद ट्राफिक पुलिस को बीस रुपये का चढ़ावा देना पड़ता है, अगर आप गाड़ी  चलाते समय फोन पर बात करते पकड़ा गये तो तीस रुपये में बात बनेगी और हेलमेट घर में छूट गया तो उसके लिए चाय नाश्ता  नहीं बल्कि उनके भोजन का इंतज़ाम करना होगा जिसकी कीमत पचास से एक सौ के बीच हो सकती है जो काफी हद तक आपके शक्ल सूरत पर भी निर्भर करता है.
आज सड़क से लेकर संसद तक इस बात का चर्चा है की देश के लिए आतंकवाद, नक्सलवाद सबसे बड़ा समस्या है. लेकिन अगर हम एक नज़र सड़क दुर्घटना और नक्सलवाद के तुलनात्मक अध्ययन पर देते है तो परिणाम हमें रोंगटे खड़े करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है .परिदृश्य कुछ इस प्रकार है कि जहाँ हमारे देश में नक्सली हमले से मरने वालों की संख्या तीन हजार के इर्द गिर्द घूमता है वहीं सड़क दुर्घटना में लगभग एक लाख अड़तीस  हज़ार लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं, और लगभग तीस हज़ार ज़ख़्मी होकर काल के गाल में जाने से बच जाते हैं . ज़रा इसके दूसरे पहलु पर नज़र दौड़ाते हैं तो हमें यह भी ज्ञात हो जाता है की इस घटनाओं से मानव संसाधन के साथ साथ उनके बीमा की राशी पर लगभग बीस अरब डॉलर का  हमारा आर्थिक नुकसान भी होता है. इन सभी पहलुओं को देखते हुए सबसे बड़ा प्रश्न हमारे सामने आ खड़ा होता है की आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है. शुरुआत अपने घर से, विद्यालय जाने के लिए पापा बच्चों को मोटर साईकिल तो दे देते हैं न तो उनके उमर का  ध्यान दिया जाता है न तो सुरक्षा सामान अर्थात हेलमेट का। अगर बात मंत्रालय की करें तो इसके लिए सबसे जरूरी है की यातायात पुलिस की भर्ती के समय उनकी काबिलियत को देख के उनका चयन किया जाए फिर उनको आवश्यकतानुसार प्रशिक्षित किया जाए। बात अगर दूसरे देशों की करें तो हमारे आस पड़ोस वाले(चाइना, लंका, बांग्लादेश) भी हमसे पीछे हैं।  जिस प्रकार आतंकवाद हमारे लिए चिंता का विषय है ठीक उसी प्रकार सड़क दुर्घटना भी ऐसा मुद्दा है जिसे नज़र अंदाज़ करना खतरे से खाली नहीं है।  

Wednesday, 29 June 2011

ये लूट का सिलसिला..............

दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे
हम वतन के लिए॒ सिर कटाते रहे


280 लाख करोड़ का सवाल है ...
भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के
डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह
भी कहा है कि भारत का लगभग 280
लाख करोड़
रुपये उनके स्विस
बैंक में जमा है. ये रकम
इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट
बिना टैक्स के
बनाया जा सकता
है.
या यूँ कहें कि 60 करोड़
रोजगार के अवसर
दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है
कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4
लेन रोड बनाया
जा सकता है. ऐसा भी कह
सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये
रकम
इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60
साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत
नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं
और नोकरशाहों ने
कैसे देश को

लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है.
इस सिलसिले को
अब रोकना

बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज
करके करीब 1 लाख
करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280
लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64
सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने
करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट
लोगों द्वारा जमा
करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की
कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके
रखा हुआ
है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार
है.हाल ही में हुवे घोटालों का
आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी
स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन
से घोटाले
अभी उजागर होने वाले है ........

Friday, 13 May 2011

पोलिथीन हटाओ प्राण बचाओ


लोगों में दिनो दिन बढ़ता पॉलीथीन का उपयोग अब प्रदूषण के लिए खतरनाक होते जा रहा है। पॉलिथीन पर रोक के प्रयास तो कई बार हुए लेकिन इसका उपयोग कम होने के बजाए लगातार बढ़ते जा रहा है। लोग पॉलिथीन का उपयोग कर स्वयं अपने भविष्य के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं।

बाजार में लगभग प्रत्येक सामान के खरीदी के साथ आसानी से उपलब्ध होने वाला पॉलिथीन बहुत सस्ती होती हैं इसलिए इसके खतरों को जानते हुए भी लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे है। पॉलिथीन कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की जमीन पर पड़े पॉलिथीन को पालतू जानवर अपने भोजन के साथ निगल लेते हैं जो उनकी मौत तक का कारण बनता है। पॉलिथीन जमीन की उर्वरक क्षमता को भी तेजी से प्रभावित कर रही है। पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाने के साथ साथ आम जनता में जागरुकता लाने व्यापक पैमाने पर कार्यक्रम की भी जरूरत है। पॉलिथीन के उपयोग करने के बाद उसको संग्रहित करने की व्यवस्था हो जिससे उसी पॉलिथीन को फिर से उपयोग के लायक बनाया जा सके इससे प्रदूषण की समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है। पॉलिथीन पैक पान मसाला तथा गुटखों पर भी रोक लगाई गई है लेकिन ऐसे पाउच धड़ल्ले से बिक रहे हैं। सरकार नियम तो बनाती है लेकिन पालन नहीं होता जिसके कारण लोग पॉलिथीन के उपयोग धडल्ले से कर रहे है।

भास्कर के सौजन्य से

Thursday, 12 May 2011

हमरा जागरूक होबाक चाही

हम बात क रहल छि पोलीथींन  के. आजुक समय में पोलीथींन  हमर रोजमर्रा के जीवन के एकता अभिन्न अंग भा गेल अछि . मुदा एकर पर्यावरण पर बहुत बरका असर पैर रहल अछि  . एकटा प्लास्टिक के नष्ट  होबा में जते समय लगे छाई तत्बाई में अपन सब के कई टा पुस्त बीत जै छाई. भारत वर्ष में कतेक गोटा एकरा हटेबाक लेल प्रयाश का रहल छैथ किनको सफलता भेतलैन किओ सफलता के इंतजार में छैथ . टा आओ हमहू सब मिल के एकरा हतेबक प्रयाश करी . हमारा हिसाब से हिमानचल , महाराष्ट्र , जम्मू   और गुजरात के किछु  प्रान्त में अहि विषय  पर उत्तम काज भेल आ सफलता सेहो भेटल . त इ प्रयाश हम अपन मिथिला बंधू से सेहो करबाक इच्छा जत्बाई छि . हम आहा सब के कल जोरी के विनती कराइ छि जे एकरा एकही बेर नही मुदा धीरे धीरे हटेबाक प्रयाश करू . अपन सब के सरकार एकरा हटेबाक लेल बड्ड पैघ पैघ बात बनबाई छैथ मुदा ख़तम  करबाक लेल प्रयाश एकदम नहीं कराइ छैथ . पोलीथिन मनुष्य समेत अन्य जिव के लेल सेहो खतरनाक अछि और ओकरा जरेबाक बाद निकलल धूआन कैंसर के न्योता देत अछि . प्रत्येक वर्ष ५०० विलियन पोलीथिन के उपयोग पूरा विश्व में होइत अछि . एखन देश दुनियां के पहिल चिंता अछि बिग्रैत पर्यावरण . लोक एकरा बचेबक में अपन भूमिका के नही बुझाई छैथ और कहै छैथ हम कैए की सकै छि ? एतेक सोचला के बाद हमहू एहे सोची छि  जे हमारा जागरूक होबाक चाही  .

धन्यबाद
अपनेक विभूति झा

Thursday, 5 May 2011

झंझारपुर एक नजर

झंझारपुर (मधुबनी)। एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार बुधवार को पूर्व मध्य रेलवे समस्तीपुर के डीआरएम सत्य प्रकाश त्रिवेदी ने झंझारपुर जक्शन का निरीक्षण किया। इससे पूर्व बीते गुरुवार को औचक निरीक्षण में जंक्शन के व्यवस्था से खफा डीआरएम ने एसएस सहित कुल आठ कर्मियों को निलंबित कर दिया था। निलंबित कर्मियों को मंगलवार को उस समय बड़ी राहत मिली जब डीआरएम ने भविष्य में गलती न करने की चेतावनी के साथ निलंबन खत्म कर दिया। बुधवार को पहुंचे डीआरएम सत्य प्रकाश त्रिवेदी जंक्शन की साफ सफाई की व्यवस्था संतुष्ट नजर आए। निरीक्षण के दौरान उपस्थित कर्मियों को डीआरएम ने सभी व्यवस्थाएं चुस्त दुरूस्त रखने का आदेश दिया। रेलवे सूत्र के अनुसार डीआरएम ने तमुरिया घोघरडीहा एवं निर्मली स्टेशनों का भी निरीक्षण बुधवार को किया और कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिया।
जागरण के सौजन्य से

Monday, 18 April 2011

मैथिलि संगीतक पतन


 मिथिलाक सांस्कृतिक परम्परा संगीतक क्षेत्र में देखल जा सकैत अछि. प्राचीन मिथिलाक शासक संगीतज्ञ लोकनिक के संरक्षण दैत छलाह. एकर अनेको उदाहरण अछि. नान्यदेवक ( ११०७-११३३ ई.)  अवदान कदापि विस्मृत नहीं कैल जा सकैत अछि. लोकप्रिय रागक क्षेत्र में हुनक बड़ पैघ योगदान छलैन. ओ स्वयं १६० रागक प्रतिपादन कैने छलाह. तत्पशात हरिसिंहदेव, सिंह भूपाल, जगधर, जग्ज्योतिर्मल, वंशमणि झा, शुभंकर ठाकुर, घनश्याम मल्लिक, चंदा झा आ अनेकानेक व्यक्तिक नाम एही क्षेत्र में ज्योतित भेल.
          मिथिलाक चारिटा संगीत घराना प्रसिद्ध छल -अमता, मधुबनी, पंचोभ, आ पंचगछिया.ई सब मिली क  १०० वर्ष सँ मिथिला मध्य जन-मन में संगीतक आनंद प्रवाहित क रहल छैथ. 
         
                  मुदा दुखक बात इ जे आइ मिथिला लोक संगीतक धरोहर नष्ट  भ रहल अछि. मैथिलि लोक गीतक स्वर में पतन स्पष्ट परिलक्षित होइत अछि. ओकरा आइ बम्बैया तर्ज पर गाओल जा रहल अछि. भोजपुरी भाषाक गीतक अनुकरण एकरा मुख्य धारा सँ भटका रहल अछि. विभिन्न मैथिलि कैसेट एकर प्रत्यक्ष प्रमाण अछि. गाम-गाम में एखनो दुर्गापूजा, महादेवपूजा जेहन आयोजन होएत अछि. मुदा जतय पहिने शास्त्रीय गायन होएत छल ओतए आब पशिमी पॉप धुन पर आधारित आर्केस्ट्रा के बिना मनोरंजन संभव नहीं बुझाना जाइत अछि. 
    त आऊ हम सब मिलिके मिथिलांचलक संगीतके लुप्त होबा सँ बचाबी.      

Sunday, 17 April 2011

दरभंगा समाचार

दिनांक १६/४/२०११ शैन दिन बहेरी थाना अंतर्गत लहेरियासराय बहेरी मार्ग पर दू गोटा मौत के घाट उतैर गेलाह. घटनास्थल पर मौजूद लोक सब के अनुसार दुनु गोटे सड़क पार करबाक क्रम में एकता ट्रक के चपेट में आइब गेलाह जेहि स घटनास्थल पर हुनकर मृतु भ गेल. 
          डी.एस. पी. अंजनी कुमार कहलें जे ट्रक चालाक नशा में छल ओकर पहचान श्रवण कुमार के रूप में कैल गेल अछि .